उदर-शुद्धि के कुछ उपाय | Some remedies for abdominal purification

सोकर उठने से पूर्व बिस्तर पर हाथ पैर फैलाकर और बदन ढीला करके चित्त लेट जाओ| दोनों हाथ की कोहनियों से तिल्ली व जिगर को दबाकर पैरों को सिकोड़ो और फिर फैला दो| इस प्रकार तीन-चार बार करने के पश्चात् ५-७ बार इधर-उधर करवट लेकर आलस्य को दूर करो| तत्पश्चात एक या दो मिनट तक पेट के बल लेटो और तुरंत उपर्युक्त स्वर नियम के अनुसार बिस्तर छोड़ दो| इस क्रिया से मल ढीला होगा, तिल्ली की शिकायत है तो इसका प्रयोग किये बिना औषधि-लाभ प्राप्त करें| जिन्हें उपर्युक्त रोग नहीं है, उन्हें भी इससे लाभ होगा| सप्ताह में दो तीन बार करने पर भी हित होता है| बिस्तर छोड़ने से पहले पेट के बल अवश्य लेटना चाहिए| सोकर उठने तथा भोजन के पश्चात् दाहिने ओर से २-३ बार अपने मस्तिष्क को पकड़ना चाहिए| शास्त्र में इस क्रिया को 'कपाल-भाती' कहते हैं| इससे कफ दोष नाश होते हैं| इसी प्रकार सोकर उठने तथा संध्या समय तर्जनी को कानों में डालकर खुजलाना चाहिए| शास्त्र में इस क्रिया को 'कर्णभाती' कहा है, इस क्रिया से कान के रोग अच्छे हो जाते हैं|


आरम्भ में सीधी करवट लेटने से यकृत पर जोर पड़ता है, जिससे पाचन शक्ति में रूकावट होती है| इसलिए भोजन पचाने के निमित्त दक्षिण स्वर चलाने की आवश्यकता है, अतएव बाएं करवट ही लेटना उत्तम है, अपितु रात्रि में जितने अधिक समय के लिए पिंगला स्वर चले, उतना ही उत्तम है| जैसा कि कहा गया है-

दिन में जो चंदा चले, रात चलावे सूर |

तो यह निश्चय जानिए, प्राण गमन है दूर |


कई व्यक्ति सन्देह करते हैं कि बाएं करवट लेटने से दिल दबेगा तथा उसकी चाल में कमजोरी आएगी; किन्तु यह भ्रम मात्र है, क्योंकि पाचन-क्रिया ठीक रहने से ह्रदय की गति कदापि शिथिल नहीं हो सकती|


आमाशय या आंत-सम्बन्धी रोगों में साँस को छोड़ते हुए नाभि-ग्रंथि को मेरुदण्ड की हड्डी से चिपकाने का प्रयत्न करना चाहिए| साँस छोड़ते समय पेट को खूब पिचकाना और खींचते समय फुला देना, इस क्रिया को बार-बार करने पर पेट की खराबियां मिट जाती हैं और पाचन-क्रिया ठीक होने लगती है|


ज्वर - अपराजिता या मोलसिरी के कुछ पत्तों को हाथ में मसलकर किसी छोटे रुमाल में पोटली सी बनावें और बार - बार सूंघते रहें तो विषम ज्वर बहुत जल्दी अच्छा हो जाता है |


थकान - कड़ी मेहनत पर जब शरीर में थकान आ रही हो तो दाहिने करवट लेटे रहना चाहिये , जिससे बाया स्वर चलने लगे | इस प्रकार थकावट बहुत जल्द दूर हो जाएगी |


सिर , पीड़ा या आधाशिशी - आधाशीशी या सिरदर्द के रोगों में नासिका द्वारा जल खींचना बहुत ही अच्छा है | इससे सिर के सब रोग अच्छे हो जाते हैं | जिस भाग में अधिक दर्द होता है , उसके विपरीत नथुने से थोड़ा सा घृत उपर चढाया जाय तो भी लाभ होगा |




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