उपवास का जादू || Fasting spell

उपवास मानव शरीर में आकाश तत्व की वृधि का एक सहज एवं स्वाभाविक साधन है | यह मन और शरीर दोनों को निर्मल बनाता है | रोग निवारण के साथ – साथ इनमें शरीर को शक्ति सम्पन्न बनाने की आलोकिक क्षमता है | अत: प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत इसे बड़ा महत्व दिया जाता है |



उपवास के लाभ असंख्य है किन्तु प्रधान लाभ है पाचन क्रिया को ठीक करना तथा पेट की मशीन को कुछ आराम देना | रोगी जब आहार छोड़ देता है , तब उसकी आहार पचाने वाली शक्ति उसके  रोगों  का शमन करने में लग जाती  है , वह शीघ्र निरोग हो जाता है | प्राचीन शास्त्रों में लिखा है – “ अग्री आहार को पचाती है और जब पेट में आहार नहीं रहता , तब वह रोगों को पचाती है यानी नष्ट करती है | ” सुश्रुत के अनुसार उपवास से ज्वर का नाश होता है , अग्री का दीपन होता है , शरीर हल्का हो जाता है |


जिस प्रकार उपवास रोगों को नष्ट करता है , उसी प्रकार यह हमारी वासनाओ को दबाता है , विकारों को नष्ट कर देता है , आंतरिक शान्ति और संयम सिखाता है | मोटे , बादी से भरे व्यक्तियों के लिए उपवास से बड़कर दूसरा कोई अच्छा उपाय नहीं |



जिन्हें गर्मी , नासूर , बवासीर , गठिया , सिर दर्द , मूत्राशय का सूजन , मधुमेह , उपदंश , दमा या श्वास रोग , मेद रोग , यकृत में रक्त का जम जमाव , पीप पड़ना , मोतीझरा इत्यादि हो , उन्हें उपवास से अवश्य लाभ उठा लेना चाहिए | नीचे लिखे हुए रोगों में आंशिक उपवास से लाभ होता है – कफ , कब्ज , अतिसार , शूल , सिरदर्द , चर्मरोग , दातों के रोग पायरिया , कृमि तथा जुकाम |



उपवास किन रोगों में लाभ नहीं पहुँचाता उन्हें भी याद कर लीजिये – वायुविकार , मानसिक वायु रोग नामक बीमारियों में उपवास लाभ नहीं करेगा | पागलपन या यकृत या फेफड़े का जो हिस्सा नष्ट हो गया हो , उसमें भी उपवास से कोई लाभ नहीं होता है | कमजोर और रक्त – हीनता के रोगियों को उपवास नहीं करना चाहिए |

शरीर शोधन का सबसे प्रभावशाली और सीधा रास्ता उपवास ही है | उपवास के प्रयोजन के लिए कुछ अच्छा साहित्य अवश्य पड़ ले |



कुदरत आपको हमेशा भूख बन्द होने की हालत में विश्राम करने की सलाह देती है प्रकृति के बताये हुए मार्ग पर चलने से ही उपवास द्वारा हम पाचन प्रणाली को विश्राम दे सकते है |

जिह्वा के स्वाद के वशीभूत न होइये | अपनी पाक प्रणाली पर अत्याचार न किजिये | अल्पाहार ही दीर्घायु का मूल है |

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