Health benefits of Kasini (chicory)

Health benefits of Kasini keerai, Arisi Thengai Payasam, The chicory (kasini) leaves are used in the form of tonic in ayurvedic medicine. Chicory leaves are also called as kasini , kasini keerai benefits, kasini keerai in hindi ,


What is chicory flora | क्या है कासनी वनस्पति

कासनी जिसका वानस्पतिक नाम चिकोरियम इंटाईबस ( Cichorium intybus) है | यह एस्टेरेशिया कुल का पौधा है | स्थानीय भाषा में इसे कासनी , काशनी , कासानी आदि नामों से जाना जाता है | अंग्रेजी में इस वनस्पति को चिकोरी कहते हैं | यह मूल रूप से यूरोप के देशों में पाई जाती है | भारत में यह पौधा उत्तराखण्ड , हिमांचल प्रदेश तथा जम्मू कश्मीर के निचले क्षेत्रों एवं पंजाब , हरियाणा तथा दक्षिण के आंध्र प्रदेश , तमिलनाडू एवं कर्नाटक में पायी जाती है | अत्यधिक कीटनाशक , खरपतवार नाशक दवाओ के प्रयोग से इस समय यह प्रजाति लुप्त प्रायः की श्रेणी में है | इसकी दो अन्य प्रजातियाँ बहुतायत मात्रा में पाई जाती हैं , जो खास कर चारे के लिए बोयी जाने वाली बरसीम घास में उगती है | इन प्रजातियाँ पर क्रमशः सफेद एवं पीले रंग के पुष्प निकलते हैं , जबकि इस कासनी पौधे पर नीले रंग के पुष्प निकलते है , जो काफी समय तक पौधों पर रहते हैं जिस कारण पौधे की सुन्दरता और भी बढ़ जाती है , इसी कासनी की पहचान औषधि के रूप में होती है |



Research for control of diseases | रोगों पर नियन्त्रण हेतु शोध


चूँकि कासनी का औषधि प्रयोग कोई नया नहीं है | आयुर्वेद , यूनानी , सिद्ध पद्धति से इस वनस्पति की औषधि बनायी जाती है | बहुत सी दवा कम्पनी इसके साल्ट को लीवर , बुखार , पेट रोगों की दवा में प्रयोग करते हैं , परन्तु कासनी का सीधे पत्ती चबाकर खाने का प्रयोग / शोध अपने आप में नया प्रयोग है | क्योंकि किसी वस्तु की दवा गोली , कैप्सूल या सीरप आदि लेने सीधे पेट में जाता है , यदि पेट में एसिड या अन्य विकार होगा तो दवा काम नहीं करती है , जबकि कोई भी वस्तु को चबाने से उसका सीधा प्रभाव लार ग्रंथियों से होता है | इस विधि का प्रयोग मैंने कुछ रोगियों में कुछ लीवर , शूगर , किडनी , रक्तचाप , बवासीर के रोगियों पर अजमाया , जिसके परिणाम सकारात्मक मिलें |


advice | सलाह


मधुमेह , किडनी संक्रमण , रक्तचाप तथा लीवर रोगियों को यह सलाह देता हूँ कि वे कासनी के 10-15 पौधे गमले अथवा भूमि पर लगाये , पौधे की उम्र पूरी होने पर नीले फूल के स्थान पर जीरे के आकार का छोटा सा बीज बनेगा उस बीज को साफ कर तुरंत रेते में बो दिया जाये तो वह तीन से चार दिन में अंकुरण प्रारंभ कर देता है , दो पत्ते के बाद उस अंकुरण को पुनः रेते से उखाड़ कर किसी दुसरे गमले या पौलिबैग में मिट्टी और सुखी गोबर की खाद का मिश्रण कर प्रत्यारोपित किया जाये | लगभग 30 से 35 दिन के उपरान्त पौधे से 2 पत्ती सुबह खाली पेट तथा सायं खाना खाने से 1 घंटा पहले तोड़कर साफ पानी से धोकर पान की तरह से मुँह में डाल कर चबा -चबा कर खा लेना है , जितनी देर मुँह में चबाते रहेंगे जल्दी लाभ होगा | कासनी के ताजे पत्ते ही चबा - चबा कर खाने एवं उसके बाद 30 - 40 मिनट तक कुछ नहीं खाना ही रोग पर जल्दी विजय पाना है | पत्ती चबाने में असमर्थ रोगियों को चटनी या जूस बनाकर भी दिया जा सकता है | जीर्ण किडनी रोगी को कासनी के बीज काड़ा भी पिलाना लाभप्रद होगा |




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