How to get freshness | ehealthshiksha

इन सब विधियों से जो लाभ होता है उसका मूल कारण ठंडे पानी की प्रतिक्रिया ही होती है | जिस प्रकार शरीर में ठंडे पानी के छीटे मारने से फुरहरी सी आती है और रोंये खड़े हो जाते है और उसी के फलस्वरूप में रक्त संचार की गति तेज हो जाती है इसी प्रकार उक्त स्नानो और पट्टियों के प्रयोग में जहाँ शीतल पानी का स्पर्स होता है , वहाँ पहले तो गर्मी की कमी हो जाती है , पर बाद में उस कमी की पूर्ति के लिए भीतर रक्त वहाँ खिंच आता है | इस प्रकार जब रक्त की गति तेज होती है तो उसके साथ दूषित विजातीय द्रव्य भी बहकर मलाशय की तरफ ढकेले जाते है | इस प्रकार जल के प्रभाव से रोगों का निवारण होता है और सुस्त तथा निर्बल अंगों को नवीन चेतना प्राप्त होती है |

अधिकांश रोगों की जड़ पेट सम्बन्धी खराबी अथवा कब्ज ही होती है | उसका दूषित विकार नीचे के हिस्से में ही रहता है | कटिस्नान दुवारा इसी भाग को चैतन्य किया जाता है , इससे पुराने और सड़े मल के निकलने में सहायता मिलती है | कठिन अवस्था में कटिस्नान और एनीमा दोनों का एक साथ प्रयोग किया जाता है ,जिससे शरीर की शुद्धी शीघ्रतापूर्वक होती है | शरीर को शीतलता पहुंचाकर वहाँ की हानिकारक गर्मी को निकाल देने से समस्त शरीर को नवजीवन और स्फूर्ति की प्राप्ति होती है | रीढ़ के बीच होकर ही ज्ञान तंतुओ का मुख्य संस्थान है , इसलिए रीढ़ को जलधारा दुवारा अथवा कपड़े की पट्टी दुवारा ठंडक पहुँचाने से मस्तिष्क की निर्बलता दूर होती है |


सूर्य के प्रकाश का भी मानव जीवन में बहुत असर पड़ता है सूर्य के प्रकाश के अधिक संपर्क में रहने का प्रयत्न करना चाहिए | मकान के भीतरी भाग में भी धूप पहुँचती रहे ऐसे खिडकियों की व्यवस्था करनी चाहिए | कपड़ों को रोज धूप लगानी चाहिए | धूप के संपर्क में रहने वाले निरोग और स्वस्थ रहते है गर्मी की दोपहरी की तेज़ धूप को छोड़कर सहा धूप का शरीर पर पड़ना सदा लाभदायक रहता है |

स्नान करके गीले शरीर से प्रातः कालीन सूर्य के दर्शन करने और उन्हें अर्घ्य चढ़ाने का नियम बड़ा अच्छा है | सूर्य दर्शन के पश्चात नेत्र बन्द करके उनका ध्यान करना चाहिए | और मन ही मन उनका ध्यान करना चाहिए | ये आदतें शरीर को स्वस्थ व ताजगी दिलाती है |

4 views
  • Twitter
  • Facebook

©2020 by e-healthshiksha