Man is the pole of life truth | मनुष्य जीवन का ध्रुव सत्य है

मोटे तौर से जो बात जैसे सुनी है, उसे वैसे ही कहना सत्य है; किन्तु सत्य की यह परिभाषा बहुत ही अपूर्ण और असमाधान कारक है । सत्य एक अत्यंत विस्तीर्ण और व्यापक तत्व है। वह सृष्टि निर्माण के आधार पर ( स्तम्भों में ) सबसे प्रधान है । सत्य भाषण उस महान सत्य का एक अत्यंत छोटा अणु है , इतना छोटा जितना समुद्र के मुकाबले में पानी की एक बूँद।





सत्य बोलना चाहिए, पर सत्य बोलने से पहले सत्य की व्यापकता और उसके तत्वज्ञान को जान लेना चाहिए; क्योकि देश, काल और पात्र के भेद से बात धर्मग्रंथो में मामूली से कर्मकाण्ड के फल बहुत ही बढ़ा - चढ़ाकर लिखे गये हैं | जैसे गंगा स्नान से सात जन्मों के पाप नष्ट होना , व्रत , उपवास से स्वर्ग मिलता , गौ दान से वैतरणी तर जाना , मूर्ति पूजा से मुक्ति प्राप्त होना , यह सब बातें तत्वज्ञान की दृष्टि से असत्य है ; क्योंकि इन कर्मकांडो से मन में पवित्रता का संचार होना और बुधि का धर्म की ओर झुकना तो समझ में आता है , पर यह समझ में नहीं आता की इतनी सी मामूली क्रियाओं का इतना बड़ा फल कैसे हो सकता है | यदि होता तो योग , यज्ञ और तप जैसे महान साधनों की क्या आवश्यकता रहती ? टके सेर मुक्ति का बाजार गर्म रहता | अब प्रश्न उपस्थित होता है की क्या वह धर्म ग्रन्थ झूठे हैं ? नहीं | उन्होंने एक विशेष श्रेणी के अल्प बुधि के , अविश्रासी , आलसी और लालची व्यक्तियों को उनकी मनोभूमि परखते हुए ,एक खास तरीके से अलंकारिक भाषा में समझाया | ऐसा करना अमुक श्रेणी के व्यक्तियों के लिए आवश्यक था , इसलिए धर्मग्रंथो का वह आदेश एक सीमा में सत्य ही है |


बच्चे के फोड़े पर मरहम पट्टी करते हुवे डाक्टर उसे दिलासा देता है | बच्चे ! डरो मत , जरा भी तकलीफ न होगी | बच्चा विश्वास कर लेता है ; किन्तु डॉ. की बात झूठी निकलती है | मरहम पट्टी के वक्त बच्चे को काफी तकलीफ होती है , वह सोचता है की डॉ. झूठा है , उसने मेरे साथ असत्य भाषण किया ; परन्तु असल में वह झूठ बोलना नहीं है |


अध्यापक बच्चों को पाठ पढ़ाते समय ऐसे उदाहरणो को प्रकट करते हैं , जो अवास्तविक और असत्य होते हैं , फिर भी अध्यापक को झूठा नहीं कहा जा सकता है | तांत्रिक और मनोविज्ञान के उपचार में प्राय: नब्बे फीसदी झूठ बोलकर रोगी को अच्छा करना पड़ता है ; परन्तु वह सब झूठ की श्रेणी में नहीं ठहराया जाता |

राजनीति में अनेक बार झूठ को सच सिध किया जाता है | दुष्टों से अपना बचाव करने के लिए झूठ बोला जा सकता है | आर्थिक , व्यावसायिक या अन्य ऐसे ही भेदों को प्राय: सच - सच नहीं बताया जाता |


राजनीति में अनेक बार झूठ को सच सिद्ध किया जाता है | दुष्टों से अपना बचाव करने के लिए झूठ बोला जा सकता है | आर्थिक , व्यवसायिक या अन्य ऐसे ही भेदों को प्रायः सच - सच नहीं बताया जाता |


किसी व्यक्ति के दोषों को खोलकर उससे कहा जाय तो वह अपने को निराश , पराजित और पतित अनुभव करता हुआ वैसा ही बन जाता है | ऐसा सत्य असत्य से भी बढकर निन्दनीय है |


|| मनुष्य जीवन का ध्रुव सत्य है ||

|| Man is the pole of life truth ||





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