Soil natural medicine | मिट्टी की प्राकृतिक चिकित्सा

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मिट्टी प्रकृति की मुफ्त दवा है , जो सबको घर बैठे मिल सकती है | जिस मिट्टी का प्रयोग हम चिकित्सा में करें वह बिल्कुल स्वच्छ , ताजी और दुर्गन्ध रहित होनी चाहिए | उसे साफ करके प्रयोग में लेनी चाहिए | मिट्टी चार रंग की होती है -

1 . काली

2. पीली

3. सफेद और

4 .लाल

काली मिट्टी विष को हरने वाली है | सब प्रकार के विष को तत्काल नष्ट करके शरीर को स्वस्थ करती है | सांप , बिच्छू , ततैया , पागल कुत्ते आदि के काटे जहर को दूर करने में इसका प्रयोग लाभकारी है | विष खा लेने , बिजली गिर जाने , हैजा होने पर रोगी के गर्दन का भाग बाहर रखकर शेष सब गड्डे में इसी प्रकार दबा देना चाहिए | परन्तु यह ध्यान रहे की जिस जमीन में रोगी को दबाया जाय , वह गरम या सूखी न हो बल्कि गीली और ठण्डी होनी चाहिए | ततैया , मधुमक्खी आदि कम विषैले डंक लगने पर तमाम शरीर को मिट्टी में दबाने की आवश्यकता नहीं , बल्कि जिस स्थान पर डंक लगा हो , उसी स्थान को जमीन में दबाना चाहिए या उस पर गीली मिट्टी की पुल्टिस बाधना चाहिए | कुते के काटे में भी दंशित भाग को मिट्टी में दबाना या पुल्टिस बाधना काफी होगा | वर्त्तमान में यदि इसका उचित उपचार उपलब्ध हो तो वो इस विधि से अधिक उपयोगी साबित हो सकता है |





गरमी की सूजन , मस्तिष्क और नेत्रों का विकार , प्रदर और प्रमेह आदि विजातीय द्रव्यों से उत्पन्न रोगों को शांत करने का गुण भी मिट्टी में है | इन रोगों ले लिए गेरुआ ईट जैसी लाल मिट्टी काम में लायी जाती है |

पेडू और पेट शरीर के सब रोगों का मूल आधार है | गर्मी की किसी प्रकार की बीमारी होने पर इन स्थानों पर मिट्टी की पुल्टिस बाधने से लाभ होता है | मिट्टी यदि जल्दी गर्म हो जाय , तो बदली जा सकती है | दांत के दर्द में गाल के बाहर दुखती जगह पर मिट्टी की पट्टी बाधनी चाहिए | पट्टी खोलने पर सुखी मिट्टी के कुछ कण किसी अंग या घाव में लगे रहें और छुटाने में तकलीफ हो तो लगा रहने दो , कुछ हानि नहीं |

गोबर का वैज्ञानिक अन्वेषण अत्यंत महत्वपूर्ण है | उपलों में जो रोटी सिकती है वह अधिक सुपाच्य , मधुर , पोष्टिक और गुणकारी होती है | कोयलों अथवा लकड़ी की सिकी रोटी वैसी नहीं होती |

अनिद्रा रोग के लिए भी यही उपचार करना चाहिए | उसके खाट के चारों ओर खस की जड़ो को डाल देना चाहिय जिससे जड़ में लगी मिट्टी की भीनी सुगंध उसके दिमाग में पहुचे | रोगी को छेड़ना , चिड़ाना या उससे दुखद बातें करना नहीं चाहिए |

Soil natural medicine

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