Steps to a healthy lifestyle | एक स्वस्थ जीवन शैली के लिए कदम

Some Steps to a healthy lifestyle

स्नान के उपरान्त किसी एकान्त स्थान में जाइए | समतल भूमि पर आसन बिछाकर पद्मासन से बैठे जाइए | मेरुदण्ड बिल्कुल सीधा रहे | नेत्रों को अधखुला रखिए | अब धीरे – धीरे नाक द्वार साँस खींचना आरम्भ कीजिये और दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ भावना कीजिये कि “ विश्वव्यापी महान प्राण भण्डार में से मैं स्वास्थ्य दायक प्राण तत्व साँस के साथ खींच रहा हूँ और वह प्राण मेरे रक्त के साथ समस्त नाड़ी तंतु ओ में प्रवाहित होता हुआ सूर्य चक्र में ( अमाशय का वह स्थान जहाँ पसलियों और पेट मिलते हैं ) इकट्ठा हो रहा है| ” इस भावना को ध्यान द्वारा चित्रवत मूर्तिमान रूप से देखने का प्रयत्न करना चाहिए | जब फेफड़ों को वायु से अच्छी तरह भर लें तो दस सेकेण्ड तक वायु को भीतर रोके रहें | इस रोकने के समय में ऐसा ध्यान करना चाहिए कि – “ खींचा हुआ प्राण तत्व मेरे रोम - रोम में समा गया है| ” अब वायु को नासिका द्वारा धीरे – धीरे बाहर निकालें और निकालते समय ऐसा अनुभव करें कि – “ शरीर के सारे दोष - रोग और विष साँस के साथ निकाल बाहर किये जा रहे हैं |”

इस प्रकार से आरम्भ में दस प्राणायाम करने चाहिए , फिर धीरे – धीरे बढ़ाकर सुविधानुसार आधे घंटे तक कई बार इन प्राणायामों को किया जा सकता है | अभ्यास पूरा करने के उपरान्त आपको ऐसा अनुभव होगा की रक्त की गति तीव्र हो गई है और सारे शरीर की नाड़ियों में एक प्रकार की स्फूर्ति ताजगी और विधुत शक्ति दौड़ रही है | इस प्राणायाम को कुछ दिन लगातार करने से अनेक शारीरिक और मानसिक लाभों का स्वयं अनुभव होता है |

वायु की सहायता से उत्तमोत्तम ओषधियों का सूक्ष्म किया हुआ सार तत्व ग्रहण करने के लिए , घर की आवहवा शुद्ध रखने के लिए और लोक कल्याण के लिए , थोड़ा बहुत हवन नित्य करना चाहिए | अधिक न हो सके तो धूप बत्ती या अगर बत्ती जलाकर ही रखनी चाहिए | इससे भी लाभ होता है | शुद्ध वायु के स्थानों और घरों में रहना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है | साँस मुँह से नहीं बल्कि सदा नाक द्वारा ही लेनी चाहिए | कपड़े से मुंह ढंककर कभी नहीं सोना चाहिए |

आशा उत्साह – विश्वास एवं सौभाग्य पर विश्वास करने से गिरा हुए स्वास्थ्य बहुत जल्दी फिर प्राप्त हो सकता है और साधारण स्वास्थ्य दिन – दिन उन्नति के मार्ग पर बढता जाता है | इसलिए पाठकों को चाहिए कि अपनी चिकित्सा परिचर्या एवं आहार – विहार की उत्तमता एवं शीघ्र ही उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति पर विश्वास करें | इससे उनको अपना गिरा हुआ स्वास्थ्य सम्हालने में आशातीत सफलता मिलेगी |

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल एकान्त स्थान में शांत चित्त होकर नेत्र बन्द करके बैठे जाइए | शरीर और मस्तिष्क को शिथिल कर दीजिये | सब ओर से विचारों को हटाकर निम्र भावना मंत्र पर चित्त को एकाग्र कीजिये | द्रड़ता से इस भावना मन्त्र पर चित्त को लगाइए | आपके स्वास्थ्य को सुधार की दिशा में आश्चर्यजनक प्रगति होगी |


1 view
  • Twitter
  • Facebook

©2020 by e-healthshiksha